पिछले महीने जब मैं पंजाब के लुधियाना में एक कृषि मेले में गया, तो मुझे 17 वर्षीय अर्जुन मिला जो अपने पिता की 5 एकड़ जमीन को छोड़कर शहर में इंजीनियरिंग करना चाहता था। उसका तर्क सीधा था – “खेती में कोई भविष्य नहीं है सर।” लेकिन जब मैंने उसे बताया कि आज के कृषि स्नातक औसतन 6 से 12 लाख रुपये सालाना कमा रहे हैं, और कुछ तो अपने एग्री स्टार्टअप्स से करोड़ों में खेल रहे हैं, तो उसकी आंखों में चमक आ गई। B.Sc. Agriculture 2026
भारत में 2026 तक कृषि क्षेत्र में लगभग 2.5 लाख योग्य पेशेवरों की कमी होने का अनुमान है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR की हालिया रिपोर्ट बताती है कि कृषि शिक्षा में नामांकन पिछले 5 सालों में 34 प्रतिशत बढ़ा है। यह सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं की सोच में आए बदलाव की कहानी है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे आप या आपके बच्चे 2026 में कृषि स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं, क्या योग्यताएं चाहिए, कौन से करियर विकल्प उपलब्ध हैं, और कैसे यह क्षेत्र आपके जीवन को पूरी तरह बदल सकता है।
कृषि स्नातक शिक्षा का वैज्ञानिक परिदृश्य: 2026 का परिवर्तनकारी दौर
भारतीय कृषि शिक्षा व्यवस्था 1960 के दशक में हरित क्रांति के समय से ही लगातार विकसित होती रही है। आज हमारे पास 75 से अधिक कृषि विश्वविद्यालय हैं और 300 से ज्यादा संबद्ध कॉलेज जो विभिन्न कृषि पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। ये संख्याएं सिर्फ आंकड़े नहीं हैं बल्कि भारत की बदलती कृषि शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर पेश करती हैं।
डॉ. त्रिलोचन महापात्र, जो ICAR के पूर्व महानिदेशक रह चुके हैं, कहते हैं कि “आधुनिक कृषि शिक्षा अब सिर्फ खेती की तकनीकों तक सीमित नहीं है। यह जैव प्रौद्योगिकी, सटीक कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सतत विकास का बेहतरीन मिश्रण बन गई है।”
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2023 के तहत कृषि शिक्षा में बहुविषयक दृष्टिकोण लाया गया है। अब छात्र भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान के साथ अर्थशास्त्र, प्रबंधन और तकनीक भी पढ़ते हैं। यह समग्र दृष्टिकोण छात्रों को सिर्फ किसान नहीं बल्कि कृषि उद्यमी बनाता है।
वैश्विक कृषि शिक्षा रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा देश है जो कृषि स्नातक पैदा करता है। हमारे यहां हर साल लगभग 50,000 छात्र बीएससी कृषि में स्नातक होते हैं। नीदरलैंड और इज़राइल जैसे देशों में भारतीय कृषि पेशेवरों की बहुत मांग है क्योंकि वे कम लागत में बेहतर समाधान देने में माहिर होते हैं।
कृषि स्नातक पाठ्यक्रम के प्रकार: आपके लिए कौन सा सही है?
भारत में कृषि शिक्षा सिर्फ एक डिग्री तक सीमित नहीं है। यहां आपको अनेक विकल्प मिलते हैं जो आपकी रुचि और करियर लक्ष्यों के अनुसार चुने जा सकते हैं। आइए इन पाठ्यक्रमों को विस्तार से समझें।
बीएससी कृषि (Bachelor of Science in Agriculture) यह सबसे लोकप्रिय और पारंपरिक पाठ्यक्रम है जो 4 साल का होता है। इसमें आप फसल उत्पादन, मृदा विज्ञान, पादप प्रजनन, कृषि अर्थशास्त्र और खेत प्रबंधन जैसे विषय पढ़ते हैं। पहले दो साल में बुनियादी विज्ञान और कृषि के मूल सिद्धांत होते हैं, और अंतिम दो साल में विशेषज्ञता और व्यावहारिक प्रशिक्षण होता है।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. बलदेव सिंह धिल्लों बताते हैं कि “हमारे बीएससी कृषि कार्यक्रम में अब 6 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप होती है जहां छात्र वास्तविक खेती परिदृश्यों में काम करते हैं। यह कक्षा के ज्ञान को व्यावहारिक समझ में बदलता है।”
बीएससी बागवानी (Bachelor of Science in Horticulture) यदि आपकी रुचि फलों, सब्जियों, फूलों और सजावटी पौधों में है, तो यह पाठ्यक्रम आपके लिए है। यह भी 4 साल का होता है और इसमें कटाई के बाद की तकनीक, परिदृश्य डिजाइनिंग और संरक्षित खेती जैसे आधुनिक विषय शामिल होते हैं। भारत में बागवानी क्षेत्र की वृद्धि दर सालाना 15 प्रतिशत है, जो इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं दिखाता है।
बीएससी वानिकी (Bachelor of Science in Forestry) जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के इस दौर में वानिकी पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह 4 साल का पाठ्यक्रम वन प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण, कृषि वानिकी और वन अर्थशास्त्र पर केंद्रित है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्कृष्ट हैं।
बीटेक कृषि इंजीनियरिंग (Bachelor of Technology in Agricultural Engineering) यदि आप इंजीनियरिंग और कृषि दोनों में रुचि रखते हैं, तो यह बेहतरीन संयोजन है। इस 4 साल के पाठ्यक्रम में खेत मशीनरी, सिंचाई प्रणाली, कृषि में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वचालन प्रौद्योगिकियां सिखाई जाती हैं। IIT खड़गपुर और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज जैसे संस्थान इस पाठ्यक्रम के लिए प्रसिद्ध हैं।
बीएससी रेशम उत्पादन (Bachelor of Science in Sericulture) रेशम उत्पादन में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए यह विशेष पाठ्यक्रम है। कर्नाटक और असम जैसे राज्यों में यह पाठ्यक्रम बहुत लोकप्रिय है। यह 3 से 4 साल का होता है और शहतूत की खेती, रेशम कीट पालन और रेशम प्रसंस्करण सिखाता है।
बीएफएससी (Bachelor of Fisheries Science) तटीय क्षेत्रों और जहां जलीय कृषि की संभावना है, वहां यह पाठ्यक्रम उत्कृष्ट करियर विकल्प है। यह 4 साल का पाठ्यक्रम मछली पालन, समुद्री जीव विज्ञान, जलीय कृषि इंजीनियरिंग और मत्स्य पालन प्रबंधन को शामिल करता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक है, इसलिए इस क्षेत्र में अवसर बहुत हैं।
योग्यता मानदंड: क्या आप पात्र हैं?
कृषि स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए बुनियादी पात्रता मानदंड काफी सरल हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं जो आपको जानने चाहिए।
शैक्षिक योग्यता आपको 10+2 यानी इंटरमीडिएट या सीनियर सेकेंडरी भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान या गणित के साथ उत्तीर्ण होना जरूरी है। अधिकांश विश्वविद्यालयों में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों की आवश्यकता होती है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को 5 प्रतिशत की छूट मिलती है, यानी उन्हें 45 प्रतिशत अंक चाहिए।
यहां एक दिलचस्प तथ्य है जो बहुत कम लोग जानते हैं। कुछ विश्वविद्यालय जैसे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और बैंगलोर कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय में आप गणित या जीव विज्ञान में से किसी एक के साथ भी आवेदन कर सकते हैं। लेकिन शीर्ष विश्वविद्यालय जैसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान दिल्ली में जीव विज्ञान अनिवार्य है।
आयु सीमा ज्यादातर प्रवेश परीक्षाओं के लिए न्यूनतम आयु 17 वर्ष और अधिकतम आयु 22 से 25 वर्ष होती है। कुछ राज्य जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक में ऊपरी आयु सीमा में छूट भी है। आरक्षित वर्ग के छात्रों को आमतौर पर 3 से 5 साल की अतिरिक्त आयु छूट मिलती है।
राज्य-विशिष्ट आवश्यकताएं यह बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है जो अक्सर छात्र चूक जाते हैं। कई राज्य कृषि विश्वविद्यालय अपने राज्य के निवासी छात्रों को प्राथमिकता देती हैं। उदाहरण के लिए, पंजाब कृषि विश्वविद्यलय में 85 प्रतिशत सीटें पंजाब के छात्रों के लिए आरक्षित हैं। इसलिए यदि आप किसी विशेष राज्य विश्वविद्यालय में प्रवेश चाहते हैं, तो उस राज्य की निवास आवश्यकताओं को जरूर जांच लें।
शारीरिक फिटनेस आवश्यकताएं कुछ विश्वविद्यालय, विशेषकर जो वानिकी और कृषि इंजीनियरिंग प्रदान करती हैं, बुनियादी शारीरिक फिटनेस मानदंड रखती हैं। यह इसलिए क्योंकि खेत में काम करने के लिए शारीरिक सहनशक्ति की जरूरत होती है। हालांकि यह बहुत कठोर नहीं है, लेकिन बुनियादी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है।
प्रवेश प्रक्रिया 2026: चरण दर चरण संपूर्ण मार्गदर्शिका
कृषि पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। अगर आप इसे सही तरीके से योजनाबद्ध करेंगे, तो आपकी सफलता की संभावना बहुत बढ़ जाएगी।
ICAR AIEEA (अखिल भारतीय कृषि प्रवेश परीक्षा) यह सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से स्वीकृत प्रवेश परीक्षा है जो राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA आयोजित करती है। यह परीक्षा आमतौर पर जुलाई-अगस्त में होती है, लेकिन आवेदन प्रक्रिया अप्रैल-मई में शुरू हो जाती है।
ICAR AIEEA दो स्तरों पर होता है। स्नातक यानी UG के लिए एक परीक्षा है जो बीएससी कृषि, बीएससी बागवानी, बीएफएससी और बीवीएससी यानी पशु चिकित्सा विज्ञान में प्रवेश के लिए होती है। यह कंप्यूटर आधारित परीक्षण यानी CBT प्रारूप में होता है जिसमें 150 प्रश्न होते हैं। भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान या कृषि या गणित से 50-50 प्रश्न आते हैं। कुल अवधि 2 घंटे 30 मिनट की होती है।
डॉ. अशोक कुमार सिन्हा, जो ICAR के वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं, सुझाव देते हैं कि “छात्रों को जीव विज्ञान पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि कृषि विज्ञान में जैविक अवधारणाओं की मजबूत नींव बहुत जरूरी है। NCERT की पुस्तकों को अच्छी तरह से पढ़ें और पिछले 5 साल के प्रश्न पत्र जरूर हल करें।”
2025 के ICAR AIEEA में लगभग 2.5 लाख छात्रों ने भाग लिया था और समग्र सफलता दर करीब 15 प्रतिशत थी। शीर्ष 1000 रैंक धारकों को प्रमुख संस्थानों जैसे IARI दिल्ली, GBPUAT पंतनगर और ANGRAU हैदराबाद में प्रवेश मिलता है।
राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षाएं हर राज्य की अपनी कृषि प्रवेश परीक्षा होती है जो राज्य की विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है। ये परीक्षाएं ICAR AIEEA के विकल्प या अतिरिक्त विकल्पों के रूप में काम करती हैं।
महाराष्ट्र में MHT-CET कृषि परीक्षा होती है जो अप्रैल-मई में आयोजित होती है। इसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित के 200 MCQ होते हैं। पिछले साल इस परीक्षा में 85,000 से ज्यादा छात्रों ने भाग लिया था।
कर्नाटक में KCET यानी कर्नाटक सामान्य प्रवेश परीक्षा है जो इंजीनियरिंग और कृषि दोनों के लिए सामान्य है। यह मई में होती है और इसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित के खंड होते हैं।
उत्तर प्रदेश में UPCAT यानी उत्तर प्रदेश संयुक्त कृषि और प्रौद्योगिकी परीक्षा होती है जो जून में आयोजित होती है। GBPUAT पंतनगर और अन्य उत्तर प्रदेश की कृषि विश्वविद्यालय इस परीक्षा के माध्यम से प्रवेश लेती हैं।
विश्वविद्यालय-विशिष्ट प्रवेश परीक्षाएं कुछ प्रमुख विश्वविद्यालय अपनी स्वतंत्र प्रवेश परीक्षाएं भी आयोजित करती हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय यानी BHU का BHU UET यानी स्नातक प्रवेश परीक्षा मई-जून में होता है। यह पेपर-आधारित परीक्षण है जो विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में प्रवेश के लिए होता है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय अपना AU UGAT यानी इलाहाबाद विश्वविद्यालय स्नातक प्रवेश परीक्षण आयोजित करती है। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय अपनी TNAU प्रवेश परीक्षा लेती है।
काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया एक बार जब परीक्षा परिणाम आ जाते हैं, तो काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होती है। यह आमतौर पर तीन दौर में होता है।
पहले दौर में शीर्ष रैंकरों को प्राथमिकता मिलती है। आपको अपनी प्राथमिकता के अनुसार कॉलेजों और पाठ्यक्रमों की सूची जमा करनी होती है। सिस्टम आपकी रैंक, श्रेणी और प्राथमिकताओं के आधार पर स्वचालित सीट आवंटन करता है।
यदि आप आवंटित सीट से संतुष्ट हैं, तो आपको दस्तावेज सत्यापन और शुल्क भुगतान के लिए आवंटित कॉलेज में जाना होता है। यदि आप पहले दौर में सीट नहीं लेते या बेहतर विकल्प की उम्मीद में इंतजार करते हैं, तो आप दूसरे और तीसरे दौर में भाग ले सकते हैं।
महत्वपूर्ण दस्तावेज जो काउंसलिंग में चाहिए होते हैं वो हैं 10वीं और 12वीं की अंकतालिका, प्रवेश परीक्षा एडमिट कार्ड और स्कोरकार्ड, श्रेणी प्रमाण पत्र यदि लागू हो, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र।
2026 प्रवेश के लिए समयरेखा योजना यदि आप 2026 में प्रवेश चाहते हैं, तो आपको अभी से योजना शुरू कर देनी चाहिए।
जनवरी-मार्च 2026 में प्रवेश परीक्षाओं की अधिसूचनाएं आनी शुरू हो जाती हैं। इस समय आपको नियमित रूप से ICAR, NTA और विभिन्न राज्य बोर्डों की वेबसाइट जांचनी चाहिए।
अप्रैल-मई 2026 में ICAR AIEEA और ज्यादातर राज्य परीक्षाओं के आवेदन फॉर्म भरे जाएंगे। सुनिश्चित करें कि आप अंतिम तारीख से पहले फॉर्म भर दें और सारे दस्तावेज ठीक से अपलोड करें।
जून-जुलाई 2026 में परीक्षाएं आयोजित होंगी। इस समय तक आपकी तैयारी चरम पर होनी चाहिए।
अगस्त-सितंबर 2026 में परिणाम आएंगे और काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी। अपने सारे मूल दस्तावेज तैयार रखें।
अक्टूबर 2026 में कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। अधिकांश कृषि विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र जुलाई-अगस्त में शुरू होता है, लेकिन कुछ संस्थानों में सितंबर-अक्टूबर तक कक्षाएं शुरू होती हैं।
भारत की शीर्ष कृषि शिक्षण संस्थाएं: कहां पढ़ें?
भारत में कुछ असाधारण कृषि संस्थान हैं जो विश्व स्तरीय शिक्षा, अनुसंधान सुविधाएं और उत्कृष्ट प्लेसमेंट के अवसर प्रदान करती हैं। आइए इन संस्थानों को विस्तार से समझें।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली को अक्सर “कृषि का IIT” कहा जाता है। ICAR रैंकिंग 2025 में यह लगातार नंबर वन स्थान पर है। यहां प्रवेश पाना बहुत प्रतिस्पर्धात्मक है क्योंकि हर साल सिर्फ 250 से 300 छात्र ही बीएससी कृषि में चयनित होते हैं जबकि लाखों आवेदन करते हैं।
IARI की खासियत है इसकी अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाएं। यहां के छात्रों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान परियोजनाओं में भाग लेने का मौका मिलता है। परिसर में 500 एकड़ का अनुसंधान फार्म है जहां छात्र व्यावहारिक अनुभव लेते हैं। यहां की लाइब्रेरी में 3 लाख से ज्यादा पुस्तकें और जर्नल हैं।
शुल्क संरचना बहुत उचित है। सामान्य श्रेणी के छात्रों के लिए वार्षिक शुल्क लगभग 25,000 से 30,000 रुपये है जबकि छात्रावास शुल्क अलग से 15,000 से 20,000 रुपये वार्षिक होते हैं। प्लेसमेंट रिकॉर्ड उत्कृष्ट है औसत पैकेज 6 से 8 लाख रुपये और सर्वोच्च पैकेज 15 से 20 लाख रुपये तक जाता है।
गोविंद बल्लभ पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GBPUAT), पंतनगर, उत्तराखंड भारत की पहली कृषि विश्वविद्यालय है जो 1960 में स्थापित हुई थी। यह हिमालय की तलहटी में स्थित है और इसका परिसर 5000 एकड़ में फैला है।
पंतनगर की सबसे बड़ी ताकत है इसका विविध पाठ्यक्रम और एक्सपोजर। यहां छात्रों को पहाड़ियों और मैदानों दोनों की कृषि सीखने को मिलती है। विश्वविद्यालय की अपनी डेयरी, पोल्ट्री फार्म, मछली फार्म और बीज उत्पादन इकाइयां हैं।
पूर्व छात्र नेटवर्क बहुत मजबूत है। पंतनगर के स्नातक पूरी दुनिया में कृषि क्षेत्र में नेतृत्व पदों पर हैं। डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन, जिन्हें “हरित क्रांति के जनक” कहा जाता है, ने भी पंतनगर में काम किया था।
वार्षिक शुल्क लगभग 40,000 से 50,000 रुपये है अतिरिक्त छात्रावास और मेस शुल्क के साथ। प्लेसमेंट में कृषि कंपनियां, बैंक, अनुसंधान संस्थान और सरकारी विभाग विजिट करते हैं। औसत पैकेज 5 से 7 लाख रुपये रहता है।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना हरित क्रांति का केंद्र रहा है। 1962 में स्थापित यह विश्वविद्यालय गेहूं और चावल की नस्ल सुधार में विश्व प्रसिद्ध है। PAU से विकसित की गई फसल किस्में पूरे भारत और दक्षिण एशिया में उगाई जाती हैं।
PAU में बुनियादी ढांचा शीर्ष स्तर का है। यहां 30 से ज्यादा अनुसंधान स्टेशन पूरे पंजाब में फैले हैं। छात्रों को विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में काम करने का अनुभव मिलता है। विश्वविद्यालय में हाई-टेक प्रयोगशालाएं, सटीक खेती उपकरण और आधुनिक खेत मशीनरी हैं।
शुल्क संरचना बहुत किफायती है, विशेष रूप से पंजाब के निवासी छात्रों के लिए जो लगभग 15,000 से 20,000 रुपये वार्षिक देते हैं। पंजाब के बाहर के छात्रों के लिए यह 40,000 से 50,000 रुपये है। कैंपस प्लेसमेंट में बहुराष्ट्रीय कंपनियां जैसे सिंजेंटा, बायर, मोनसेंटो नियमित रूप से भाग लेती हैं।
आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय (ANGRAU), हैदराबाद दक्षिण भारत की प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय है। यहां की विशेषता है जैव प्रौद्योगिकी और आणविक जीव विज्ञान में उन्नत अनुसंधान। विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक जीनोमिक्स प्रयोगशाला और ऊतक संवर्धन सुविधाएं हैं।
ANGRAU कई कॉलेजों के साथ संबद्ध है जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में फैली हैं। मुख्य परिसर हैदराबाद में है लेकिन घटक कॉलेज गुंटूर, बापटला, तिरुपति जैसे शहरों में भी हैं। यह छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों की खेती प्रणाली समझने में मदद करता है।
शुल्क लगभग 30,000 से 40,000 रुपये वार्षिक है। प्लेसमेंट अच्छे हैं कृषि व्यवसाय और उद्यमिता पर ध्यान के साथ। विश्वविद्यालय का इनक्यूबेशन सेंटर छात्र स्टार्टअप्स को सहायता करता है।
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU), कोयंबटूर दक्षिण भारत की सबसे पुरानी कृषि विश्वविद्यालय है जो 1971 में स्थापित हुई। यहां की ताकत है बागवानी, फूलों की खेती और बागान फसलों में विशेषज्ञता। तमिलनाडु में कॉफी, चाय, मसालों की खेती होती है तो छात्रों को अनूठी फसलों का एक्सपोजर मिलता है।
TNAU की अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बहुत हैं। अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया की विश्वविद्यालयों के साथ छात्र और संकाय विनिमय कार्यक्रम हैं। अनुसंधान में फोकस है जलवायु-लचीली किस्में विकसित करना।
शुल्क संरचना राज्य के छात्रों के लिए बहुत किफायती है लगभग 10,000 से 15,000 रुपये वार्षिक। राज्य के बाहर के छात्र 30,000 से 40,000 रुपये देते हैं। प्लेसमेंट में कृषि-निर्यात कंपनियां, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और जैव प्रौद्योगिकी फर्म सक्रिय रूप से भर्ती करती हैं।
करियर अवसर: कृषि स्नातक के बाद क्या?
यह सबसे रोमांचक हिस्सा है क्योंकि कृषि शिक्षा के बाद करियर विकल्प इतने विविध हैं कि आप चकित रह जाएंगे। पुरानी सोच कि “कृषि पढ़ने के बाद बस खेती ही करनी होगी” अब पूरी तरह पुरानी हो चुकी है।
सरकारी नौकरियां और प्रतियोगी परीक्षाएं कृषि स्नातकों के लिए सबसे सुरक्षित और सम्मानित करियर मार्ग है सरकारी क्षेत्र। UPSC यानी संघ लोक सेवा आयोग हर साल भारतीय वन सेवा यानी IFS की परीक्षा आयोजित करता है जहां कृषि और वानिकी स्नातक पात्र होते हैं। IFS अधिकारियों का प्रारंभिक वेतन 56,000 रुपये प्रति माह से शुरू होता है और वरिष्ठ पदों में यह 2 से 2.5 लाख रुपये मासिक तक जाता है।
राज्य लोक सेवा आयोग भी कृषि अधिकारी यानी AO, सहायक कृषि अधिकारी, उद्यान अधिकारी जैसे पदों के लिए परीक्षाएं आयोजित करते हैं। इन पदों में वेतन 35,000 से 70,000 रुपये मासिक होता है। साथ में सरकारी लाभ जैसे आवास, चिकित्सा, पेंशन मिलते हैं।
ICAR हर साल कृषि अनुसंधान सेवा यानी ARS की परीक्षा लेता है जो वैज्ञानिकों की भर्ती के लिए होती है। यदि आप अनुसंधान में रुचि रखते हैं तो यह सुनहरा अवसर है। ARS वैज्ञानिकों को 60,000 से 80,000 रुपये मासिक वेतन मिलता है शुरुआत में, और वरिष्ठ पदों में यह 1.5 से 2 लाख रुपये मासिक तक जाता है।
FCI यानी भारतीय खाद्य निगम, NABARD यानी राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, और विभिन्न राज्य कृषि विभाग नियमित भर्ती करते हैं। NABARD ग्रेड A अधिकारी का प्रारंभिक वेतन 44,500 रुपये प्रति माह है और यह अनुभव के साथ 1.5 लाख रुपये मासिक तक बढ़ सकता है। बैंकों में भी कृषि अधिकारियों और विशेषज्ञों की मांग है क्योंकि कृषि ऋणों का आकलन करने के लिए विशेष ज्ञान चाहिए होता है।
निजी क्षेत्र की नौकरियां बहुराष्ट्रीय कृषि कंपनियां जैसे बायर, सिंजेंटा, कोर्टेवा एग्रीसाइंस, UPL लिमिटेड हर साल सैकड़ों कृषि स्नातकों को भर्ती करती हैं। ये कंपनियां फील्ड अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, तकनीकी सलाहकार, उत्पाद विकास विशेषज्ञ जैसे पद प्रदान करती हैं।
प्रारंभिक पैकेज आमतौर पर 3.5 से 5 लाख रुपये वार्षिक होता है। दो-तीन साल के अनुभव के बाद यह 7 से 10 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। वरिष्ठ पदों जैसे क्षेत्रीय प्रबंधक या उत्पाद प्रबंधक में पैकेज 15 से 25 लाख रुपये वार्षिक होता है।
ITC, रिलायंस, अडानी जैसे बड़े व्यापारिक घराने अब कृषि में भारी निवेश कर रहे हैं। ITC का ई-चौपाल कार्यक्रम हजारों कृषि स्नातकों को रोजगार देता है। ये कंपनियां प्रतिस्पर्धी वेतन के साथ स्टॉक विकल्प और प्रदर्शन बोनस भी देती हैं।
उर्वरक कंपनियां जैसे इफको, टाटा केमिकल्स, कोरोमंडल इंटरनेशनल कृषि स्नातकों को पसंद करती हैं। बीज कंपनियां जैसे कावेरी सीड्स, नुजीवीडु सीड्स में प्रजनन और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए स्नातकों की जरूरत होती है।
कृषि व्यवसाय और उद्यमिता यह सबसे रोमांचक और संभावित रूप से सबसे फायदेमंद करियर विकल्प है। आज के दौर में कृषि स्टार्टअप तेजी से बढ़ रहे हैं और निवेशक भी इस क्षेत्र में रुचि ले रहे हैं।
केस स्टडी 1: शुभम शर्मा की सफलता की कहानी मध्य प्रदेश के शुभम शर्मा ने 2018 में GBPUAT पंतनगर से बीएससी कृषि की। पारंपरिक नौकरी लेने के बजाय उन्होंने अपना कृषि-तकनीक स्टार्टअप “फार्मईजी सॉल्यूशंस” शुरू किया जो किसानों को मिट्टी परीक्षण, फसल सलाह और इनपुट आपूर्ति सेवाएं प्रदान करता है।
शुभम बताते हैं, “मैंने अपने गांव और आस-पास के 50 गांवों से शुरुआत की। पहले साल में मैंने अपनी बचत से 2 लाख रुपये निवेश किए। मोबाइल ऐप विकसित करवाया जिसमें किसान अपनी समस्याएं पोस्ट कर सकते थे और हम समाधान देते थे। धीरे-धीरे व्यवसाय बढ़ा।”
आज फार्मईजी सॉल्यूशंस 5000 से ज्यादा किसानों को सेवा दे रहा है और कंपनी का वार्षिक कारोबार 5 करोड़ रुपये है। शुभम ने 15 कृषि स्नातकों को रोजगार दिया है। उन्हें हाल ही में एक एंजेल निवेशक से विस्तार के लिए 50 लाख रुपये का फंडिंग भी मिला है।
अनुबंध खेती और एकत्रीकरण व्यवसाय बहुत से स्नातक अनुबंध खेती मॉडल में सफलता पा रहे हैं। इसमें आप किसानों को संगठित करते हैं, उन्हें गुणवत्तापूर्ण इनपुट और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, और फिर उनकी उपज को थोक में खरीदकर बड़े खुदरा विक्रेताओं या प्रोसेसर को बेचते हैं।
जैविक खेती में उद्यमिता की बहुत गुंजाइश है। शहरी उपभोक्ता अब जैविक उत्पादों के लिए प्रीमियम देने को तैयार हैं। आप अपना जैविक फार्म शुरू कर सकते हैं या किसानों को जैविक खेती में परिवर्तित करने में मदद कर सकते हैं। भारत का जैविक खाद्य बाजार 2024 में 1.64 बिलियन डॉलर था और 2026 तक 2.13 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन कृषि उपज को प्रसंस्कृत करके ब्रांडेड उत्पाद बनाना एक लाभदायक व्यवसाय है। अचार, जैम, सूखे फल, मसाला पैकेजिंग, हर्बल उत्पाद ऐसे क्षेत्र हैं जहां न्यूनतम निवेश से शुरुआत हो सकती है।
उच्च शिक्षा और अनुसंधान यदि आपको शिक्षाविदों और अनुसंधान में रुचि है तो एमएससी और पीएचडी करके प्रोफेसर या वरिष्ठ वैज्ञानिक बन सकते हैं। ICAR संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों में संकाय पदों का वेतन 60,000 रुपये मासिक से शुरू होता है और प्रोफेसर स्तर पर 1.5 से 2 लाख रुपये मासिक तक जाता है।
विदेशी विश्वविद्यालयों में भी भारतीय कृषि स्नातकों की मांग है। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड की विश्वविद्यालय एमएससी और पीएचडी के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करती हैं। अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोजर के साथ बेहतर अनुसंधान सुविधाएं मिलती हैं।
बैंकिंग और वित्त क्षेत्र कृषि बैंकिंग एक विशेष क्षेत्र है। बैंकों को कृषि ऋण अधिकारी, जोखिम मूल्यांकन विशेषज्ञ और ग्रामीण बैंकिंग विशेषज्ञों की जरूरत होती है। NABARD, RBI और वाणिज्यिक बैंकों में ये पद 6 से 12 लाख रुपये वार्षिक पैकेज प्रदान करते हैं।
कृषि बीमा कंपनियों को भी फसल बीमा दावों का आकलन करने के लिए कृषि पेशेवरों की जरूरत होती है। यह तकनीकी ज्ञान और व्यावसायिक कौशल दोनों का संयोजन है।
अंतर्राष्ट्रीय अवसर खाड़ी देश जैसे UAE, सऊदी अरब में रेगिस्तानी कृषि और हाइड्रोपोनिक्स परियोजनाओं के लिए भारतीय कृषि स्नातक भर्ती होते हैं। पैकेज आमतौर पर 8 से 15 लाख रुपये वार्षिक होते हैं कर मुक्त।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या बीएससी कृषि करने के बाद केवल खेती ही करनी होगी?
बिल्कुल नहीं। बीएससी कृषि के बाद करियर विकल्प बहुत विविध हैं। आप सरकारी नौकरियां (UPSC IFS, राज्य कृषि अधिकारी, NABARD, FCI), निजी क्षेत्र (बहुराष्ट्रीय कंपनियां, बीज कंपनियां, खाद्य प्रसंस्करण), बैंकिंग, शिक्षा और अनुसंधान, या अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। खेती एक विकल्प है, अनिवार्यता नहीं।
2. ICAR AIEEA परीक्षा कितनी कठिन है और कैसे तैयारी करें?
ICAR AIEEA प्रतिस्पर्धात्मक है लेकिन NCERT पर अच्छी पकड़ से क्रैक की जा सकती है। भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान की 11वीं-12वीं की NCERT पुस्तकें अच्छी तरह पढ़ें। पिछले 5 साल के प्रश्न पत्र हल करें। जीव विज्ञान पर विशेष ध्यान दें क्योंकि यह कृषि के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। नियमित मॉक टेस्ट दें। यदि 12वीं में 75 प्रतिशत से ज्यादा हैं और अच्छी तैयारी है, तो अच्छी रैंक संभव है।
3. कृषि स्नातकों का शुरुआती वेतन कितना होता है?
यह पद और क्षेत्र पर निर्भर करता है। सरकारी नौकरियों में 35,000 से 56,000 रुपये प्रति माह से शुरुआत। निजी कंपनियों में 3.5 से 5 लाख रुपये वार्षिक पैकेज। बैंकिंग क्षेत्र में 5 से 7 लाख रुपये वार्षिक। NABARD ग्रेड A में 44,500 रुपये प्रति माह प्रारंभिक वेतन। अनुभव के साथ वेतन तेजी से बढ़ता है।
4. लड़कियों के लिए कृषि में करियर कैसा है?
कृषि में लड़कियों के लिए उत्कृष्ट अवसर हैं। कई टॉप रैंकर और सफल कृषि वैज्ञानिक महिलाएं हैं। फील्ड वर्क अब पहले जैसा शारीरिक रूप से कठिन नहीं है क्योंकि तकनीक और मशीनीकरण ने काम आसान बना दिया है। कॉर्पोरेट क्षेत्र, अनुसंधान, शिक्षण, कृषि पत्रकारिता में महिलाओं की अच्छी संख्या है। कुछ क्षेत्रों में महिलाओं को अतिरिक्त प्राथमिकता भी मिलती है।
5. क्या कृषि स्नातक विदेश में नौकरी पा सकते हैं?
हां, अंतर्राष्ट्रीय अवसर अच्छे हैं। खाड़ी देश (UAE, सऊदी अरब) में रेगिस्तानी कृषि और हाइड्रोपोनिक्स परियोजनाओं में भारतीय पेशेवरों की मांग है। अफ्रीकी देशों में भी अवसर हैं। USA, Canada, Australia, Netherlands में उच्च शिक्षा के बाद रोजगार संभावनाएं बेहतरीन हैं। FAO, World Bank जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भी भारतीय कृषि विशेषज्ञ काम करते हैं।
निष्कर्ष: आपका हरित भविष्य आपका इंतजार कर रहा है
कृषि शिक्षा अब केवल एक डिग्री नहीं, बल्कि भविष्य को आकार देने का एक शक्तिशाली माध्यम है। जैसा कि हमने इस लेख में देखा, 2026 में कृषि स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया है जो सही योजना और तैयारी से सफल हो सकती है।
अगर आप 2026 में प्रवेश की योजना बना रहे हैं, तो अभी से तैयारी शुरू करें। अपने NCERT की पुस्तकों को खोलें, स्थानीय खेतों का दौरा करें, पूर्व छात्रों से बात करें। और सबसे महत्वपूर्ण, यह विश्वास रखें कि कृषि में करियर न केवल सुरक्षित और लाभदायक है, बल्कि समाज में सार्थक योगदान देने का मौका भी देता है।
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