Thursday, March 5, 2026
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    बागवानी (Horticulture)

    बागवानी (Horticulture) शब्द की उत्पति ग्रीक के शब्दों से हुआ है, जिसका शाब्दिक अर्थ है उद्यान की खेती। बागवानी में फलों, सब्जियों, मशरूम, सजावटी फूलों और पौधों, मसालों, औषधियों फसलों का प्रमुख स्थान है जिसकी खेती करने से किसान को लाभ होता है। बागवानी को भविष्य की खेती भी कहा जाता है जो किसानों आय के साथ-साथ जीवनस्तर में भी बेहतर सुधार करता है।

    बागवानी क्या है ? what is horticulture

    बागवानी (horticulture) एक तेजी से उभरता हुआ कृषि व्यवसाय है। बागवानी में मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, फूलों और फलों की खेती, चाय बागान आदि प्रमुख विषय हैं। बागवानी में संभावनाओं और उसके गुणवत्ता को बेहतर बनाने का कार्य किया जाता है।फलों की मांग बाजार में सालभर रहती है। फूलों की बात करें तो इसके उत्पादन में भी काफी वृद्धि दर्ज की गई है।

    खेती में बागवानी (Horticulture) तेजी से उभरता हुआ कृषि व्यवसाय है। इस क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाएं हैं। बागवानी को भविष्य की खेती भी कहा जाता है। इसे एक बार लगा देने से कई सालों तक मुनाफा ले सकते हैं। बागवानी अपने अंदर तमाम संभावनाएं समेटे हुए है जो किसानों के लिए भविष्य में सुनहरे आय का एक साधन बन सकती है।

    भारत में बागवानी Horticulture in India

    पारंपरिक फसलों की तुलना में बागवानी में फसलों के विविधिकरण, नई तकनीकों, आधुनिक मशीनों और नई तरीकों से नुकसान की संभावनायें कम हो जाती है, इसलिये किसान इस तरफ बढ़ रहे हैं।

    बागवानी का महत्व Importance of Horticulture

    कृषि को लाभ का सौदा बनाने के लिए सरकार, कृषि वैज्ञानिक और किसान लगातार काम कर रहे हैं। अब खेती के लिए जमीन की तैयारी से लेकर खाद-बीज, सिंचाई, रखरखाव और कटाई के बाद फसलों के भंडारण तक पर खास जोर दिया जा रहा है। चाहे नई कृषि तकनीक हो या फिर उन्नत किस्म के बीज और पौधे, अब किसान भी खेती में नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

    पारंपरिक खेती के बजाय बागवानी फसलों का उत्पादन सबसे ज्यादा प्रचलन में बना हुआ है। सरकार भी अब किसानों को खाद्यान्न फसलों (Food Grains) की जगह फल, फूल, सब्जी और औषधीय पौधों की खेती (Herbal farming) के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिये कई योजनाएं (Horticulture Schemes) भी चलाई जा रही हैं, ताकि किसानों पर खेती का बोझ ना पड़े और कम लागत में अच्छा पैदावार ले पाएं।

    बढ़ रहा है बागवानी फसलों का उत्पादन

    कृषि क्षेत्र के उत्पादन को लेकर सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021-22 के दौरान बागवानी फसलों से 342 मिलियन टन उत्पादन मिला है, जो पिछले साल के मुकाबले 2.10% ज्यादा है। वहीं पारंपरिक फसलों की खेती से साल 2021-22 में 316 मिलियन टन उत्पादन हुआ। इस तरह कम होते उत्पादन के पीछे मौसम की अनिश्चितता और बीमारियों का प्रकोप इस नुकसान का प्रमुख कारण है, जिसकी चपेट में गेहूं, धान, दलहन, तिलहन जैसी पारंपरिक फसलें जल्दी आ जाती है।

    यही कारण है कि कम समय में बेहतर उत्पादन के लिए अब किसान बागवानी फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं । ऐसा नहीं है कि बागवानी फसलों में नुकसान नहीं होता, लेकिन बागवानी में फसलों के विविधिकरण, नई तकनीकों, मशीनरी और नई तरीकों का प्रयोग करने पर नुकसान की संभावनायें कम हो जाती है।

    बागवानी फसलों से हुआ प्रदूषण कम

    सर्वविदित है कि धान-गेहूं जैसी पारंपरिक खाद्यान्न फसलों की कटाई के बाद बड़ी मात्रा में फसल अवशेष बचते हैं, जो किसानों के लिए किसी काम के नहीं होते। इसके अलावा इन फसलों की खेती के लिए बड़ी मात्रा में रसायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करके उत्पादन बढ़ाया जाता है, जिससे मिट्टी के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषित होता है।

    वहीं बागवानी फसलों की खेती के लिए किसान ज्यादातर जैविक विधि अपनाते हैं, जिससे प्रदूषण के बिना ही मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कायम रहती है। इसके अलावा बागवानी फसलों की कटाई-तुड़ाई के बाद निकलने वाला कचरा पशुओं को खिलाया या पेड़ों की लकड़ी को इस्तेमाल में ले लिया जाता है, जिसके चलते प्रदूषण की संभावना ही नहीं रहती।

    बागवानी की आधुनिक खेती से बढ़ा रोजगार

    बागवानी फसलों की आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है । अब किसान फल, फूल, सब्जी और जड़ी-बूटियां उगाने के लिए खुली जमीन के बजाय पॉलीहाउस (Polyhouse), ग्रीन हाउस (Green house), लो टनल (Low Tunnel), प्लास्टिक मल्च (Plastic Mulch) और हाइड्रोपॉनिक्स (Hydroponics) का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    इससे खेती की लागत तो कम हो ही रही है, साथ ही पारंपरिक तरीकों से कहीं ज्यादा पैदावार मिलती है। अब गांव के किसानों के साथ-साथ नौकरी-पेशेवर युवा भी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बागवानी कर रहे हैं। बाकी कामों के मुकाबले बागवानी एक सुकून वाला काम है और कम मेहनत में अच्छा उत्पादन एवं लाभ भी मिल जाता है। बाजार में भी बागवानी फसलें (Horticulture Crops) आसानी से बिक भी जाती हैं, इसलिए अब गांव से लेकर शहरों तक युवा बागवानी को अपना व्यवसाय बना रहे हैं।

    Bhanwar Singh Thada
    Bhanwar Singh Thadahttps://discoverfarming.in
    Agriculture Researcher | Smart Farming Enthusiast | Practical insights on crops, livestock and modern agri-technology
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